अब वो सावन ना रहे ✍️

  • अब वो सावन ना रहे...
ना रही नदियाँ,ताल,वन
कहा गये बगीचे वो उपवन,
वो कुतली* कैरी अब नही ।
पेड़ों पे खेल अब ना रहे...................अब वो सावन (१)

वो नींम के पेड़ की ठंडी छाँव,
वह तपती दोपहरी में नंगे पाँव,
वो कुम्हार के मटके का ठंडा पानी,
वो बर्फ़*के गोले अब ना रहे..............अब वो सावन (२)

✍️धारा एस़. पाकड़ 







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